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Gohar, Mandi Shivratri

देवभूमि में मनाए जाने वाले त्यौहारों का बदलती ऋतुओं से सीधा संबंध है। प्रत्येक नई ऋतु के आने पर कोई न कोई त्यौहार मनाया जाता है लेकिन पहाड़ों के रीति-रिवाजों के अनुसार शिवरात्रि पर्व का अपना ही अलग अंदाज और वर्चस्व है । जी हां, मंडी के गोहर में शिवरात्रि के दिन अगर गांव में किसी घर में कोई भी जीव जन्म लेता है, जिसमें चाहे मनुष्य हो या फिर गाय, भेड़-बकरी, कुत्ता-बिल्ली तो गांव के सभी लोग मिलकर ढोल-नगाड़ों की थाप पर खुशी से झूमते पहुंचते हैं। उस घर में शिवरात्रि पर्व के मौके पर प्रयुक्त होने वाले शिव-पार्वती के विवाह की वर माला जोकि पहाड़ी भाषा में विख्यात 'चंदो' को तैयार कर पूजा के लिए लाते हैं और जीव के जन्म लेने की खुशी में धाम का आयोजन किया जाता है। रीति-रिवाज के अनुसार शिवरात्रि पर्व के आगमन पर क्षेत्र के युवा 15-20 दिनों से पहले ही मनोरंजन के लिए स्वयं ढोल-नगाड़े तैयार कर लेते हैं। गांव के जिस घर में चंदो को विराजित किया जाता है, वहां युवक, महिलाएं, बुजुर्ग सब शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना कर भक्ति के रंग में रंग जाते हैं। उसके बाद शिव भक्तों की पूरी टोली गांव के सबसे नि...